ये नया मुल्क है मेरा,
जिसमें पहरे पर भी पहरा है।
बोलने पर तो पहरे
लगते थे पहले भी,
अब तो जैसे साँसों पर भी पहरा है.
मोहब्बत पर तो पाबंदियां थीं ही,
अब तो दोस्तियों पर भी पहरा है.
नया लोकतंत्र है ये मेरा
जिसमें
पार्टियों पर कम,
वोटर पर ज्यादा पहरा है.
हर सड़क पर लटका-अटका सी सी टी वी,
झाँक रहा हो जैसे मेरे अन्दर,
क्या खाया क्या पिया,
मेरी आतंङियों पर भी पहरा है.
अगर मैं चढ़ता घोड़ी तो
ढूंढ रहें लठैत खोजते
हर एक जात मजहब वाले को की,
उसके सिर पर टोपी है या सेहरा है.
लिखने से डर लगता है,
कलम और शब्द को छोड़ो,
अब तो लगता है जैसे
कागज पर ही पहरा है.
इस नए मुल्क का क्या कहूँ
जहां पढा लिखा ही
अक्ल का अंधा भी है
और बहरा है,
ये नयी दुनिया है यारो
जिसमें ख़ूब है फोन पर आजादी,
बस हम सब के अस्तित्व पर
आधार का ही पहरा है.
ये नया मुल्क है मेरा
जहाँ हर कोई है पहरेदार
और पहरे पर भी पहरा है.