मैं आशा का कवि हूँ ,
अगर मैं कवि हूँ तो
बसता है जिसमें उल्लास
सपने देखने का, और
उत्साह कुछ कर गुज़रने का
मैं हूँ वो कवि,
अगर कवि हूँ तो ,
जो बुनता है सपने
एक बेहतर दुनिया के
सपने, उम्मीदों और मौजों के
जो नहीं होते निराश,
नहीं मानते हार
चट्टानों से टकराकर भी
ग़र फैली हो निराशा चारों और
तब भी ढूंढ लें चमक
एक छुपी हुयी कामयाबी की
अगर मैं कवि हूँ
तो कवि हूँ
एक सुन्दर दुनिया का
जिसमें ढूंढ लेता हूँ
विवेक, तर्क और संवेदना ,
धार्मिक पागलपन और
राजनीतिक असहिष्णुता के बीच
युद्ध, विनाश और नफरतों के बीच
खोद लेता हूँ प्यार की एक सुरंग
अगर मैं कवि हूँ, तो
हूँ मैं आशा का ही कवि।