गौरैया दिवस ।

एक गौरैया थी , भूरी चंचल
जो पेड़ पर रहती थी
एक इंसान था
जो धरती पर रहता था .


रहते थे चारों
धरती, पेड़, इंसान और गौरैया
इक संग.


समय बदला,  रुत बदली
गौरैया और पेड़ धरती संग रहते रहे.


इंसान उड़ निकला बिन पंख
ले सपनों की उड़ान
जा पहुंचा चंद्रमा पर.


वहाँ सम्पत्ति तो थी
थी जगह सपनों की उड़ान की.


पर नहीं था पेड़
नहीं थी गौरैया.


इंसान के ऊंचे सपनो ने बनाया
कुछ और नया और अनूठा ,
बिना गौरैया के उसकी याद में
गौरैया दिवस ।