क्यों जे एन यू अध्यापक संघ? WHY JNUTA?

प्रिय साथियों,

JNUTA के ये चुनाव ऐसी पृष्ठभूमि में हो रहे हैं, जहां हम शिक्षकों की हमारी आम शैक्षणिक और शोधपरक गतिविधियाँ मुश्किल हो रही हैं। हर दिन एक नई चुनौती के साथ आता है (वैधानिक निकायों की भूमिका, सेलेक्शन कमिटी, विद्यार्थी मूल्यांकन प्रक्रिया (viva-voce), विद्यार्थी चयन योग्यता, GSCASH जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों का खात्मा, प्रशासनिक नियुक्तियों में मान्य नियमों का उल्लंघन, सुनवाई के सिकुड़ते स्पेस, उपस्थिति जैसे कई मुद्दे इस सूची में आ सकते हैं), और आवास जैसे पहले से मौजूद मुद्दे भी अनसुलझे हैं। ऐसे कई मुद्दों पर शिक्षकों की पहले जैसी अनुमानितता और निश्चितता तेजी से गायब हो रही है और जारी अनिश्चितताएं भी निरंतर बढ़ रही हैं।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षकों की व्यक्तिगत और सामूहिक स्वायत्तता का दायरा लगातार सिकुड़ रहा है। शैक्षणिक निर्णय लगातार मनमाने, तर्कहीन और अव्यवहारिक बन गए हैं। जेएनयू के शिक्षक आज गहरी निराशा और घुटन महसूस करते हैं। ऐसा इसलिए नहीं है कि शिक्षक के रूप में हम संवाद या वार्ता के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं, बल्कि इसलिए है कि आज हम ऐसे प्रशासन का सामना कर रहे हैं जो तर्क और विवेकसम्मत बातों से मुंह मोड़े हुए हैं.

सबसे ज़्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि जेएनयू शिक्षक समुदाय के आपसी विश्वास (जो इसकी सबसे बड़ी ताकत रही है) को भंग करने के प्रयास किए जा रहे हैं| हमें कहा जा रहा है कि गलती शिक्षकों की है| ठीक इसी समय सीसीटीवी कैमरा, बायोमेट्रिक्स और उपस्थिति के माध्यम से निगरानी की जा रही है। ऐसा पदोन्नति (CAS), बेहतर कामकाजी परिस्थितियाँ, आवास, वेतन आयोग के लागूकरण, और Pension और PF जैसी शिक्षकों की ज़रूरी चिंताओं से ध्यान भटकाने के लिए भी किया जा रहा है। प्रशासन ने स्वयं को ही विश्वविद्यालय मान लिया है और नियमित रूप से शिक्षकों के अपमान, उत्पीड़न और अत्याचार में लिप्त हैं| वर्तमान प्रशासन ने संवाद के मंचों को ख़त्म कर दिया है। ऐसे हमले के समय में जेएनयू में शिक्षकों के पास क्या विकल्प हैं?

पहला विकल्प प्रशासन के सामने पूरी तरह से समर्पित हो जाना और उन टुकड़ों की प्रतीक्षा करना है, जो कभी-कभी हमारी तरफ फेंके जा सकते हैं। हालांकि, शिक्षक के हितों की रक्षा के साथ-साथ,JNUTA ने हमेशा जेएनयू जैसी विख्यात सार्वजनिक संस्था के लोकतांत्रिक चरित्र को सुरक्षित रखा है और इसलिए यह इसके विनाश का मूक दर्शक नहीं हो सकता। JNUTA बेहतर, समावेशी और न्यायसंगत कामकाजी परिस्थितियों के लिए शिक्षकों के अधिकारों की मांगों की सामूहिक अभिव्यक्ति है। यह इस उद्देश्य के लिए जितना वार्ताओं (negotiation) में विश्वास रखता है, उतना ही दृढ़ता से उठ खड़े होने (assertion) में रखता है। ये विकल्प एक-दूसरे के सामानांतर नहीं हैं, बल्कि पूरक हैं। यह केवल दृढ़तापूर्वक खड़ा होना ही है, जो वार्ताओं को संभव बनाता है और जिनसे शिक्षकों की मांगे और सरोकार पूरे होंगे| यदि हम हमें सुने जाने पर जोर नहीं देंगे तो हम कभी नहीं सुने जाएँगे| हमारी सामुदायिक समझ प्रभावी ढंग से व्यक्त की जानी चाहिए और संवाद तथा वार्ताओं के लिए जोर देना चाहिए।

ऐसा करते हुए हमें अपने अनुभवों से उचित सीख अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। केवल एकजुट होने – कथनी और करनी में- से ही यह संभव है कि हम अपनी आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा कर पाए। यही परिप्रेक्ष्य है, जो इस समावेशी पैनल, जिसमें अनुभव और अभिनव विचार दोनों एक साथ है, में दिखाई देता है। यदि हमेंJNUTA के नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई, तो हम सशक्त रूप से जेएनयू प्रशासन के समक्ष शिक्षकों की सामूहिक समझ स्पष्ट करने के लिए समर्पित होकर काम करेंगे। यह एक खुला और समावेशी एजेंडा है और हमारे सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए व्यक्त दृढ़ संकल्प है। इस एजेंडे को आगे ले जाने के लिए हम आपका समर्थन मांगते हैं|

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अध्यक्ष-

सोनाझरिया मिंज़, SC & SS

उप-अध्यक्ष (दो पद)-

देवेन्द्र कुमार चौबे, CIL/SLL & CS &

पार्थो दत्ता, SAA

सचिव-

सुधीर कुमार सुथार, CPS/SSS

संयुक्त सचिव (दो पद)-

अर्चना नेगी, CIPOD/SIS &

गज़ाला जमील, CSLG

कोषाध्यक्ष

राकेश कुमार, CCSEAS/SLL & CS

स्कूल प्रतिनिधि-

SSS: प्रदीप के. शिंदे & विकास रावल

SC & SS: करण सिंह

SIS (निर्विरोध): एस.एन. मालाकार & मोलिका दस्तीदार

SAA (निर्विरोध): वाई. एस. अलोने

SLL & CS (निर्विरोध): अजमेर एस. काजल & कौशल कुमार

Special Centres (निर्विरोध): चिराश्री दासगुप्ता

मतदान:

दिनांक: 31 जनवरी, 2018.

समय: 10 बजे से शाम 5 बजे तक

स्थान: 344, अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन स्कूल (SIS-II)

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