O T P

मैं ओ टी पी  हूँ
ओ टी पी.,  जो सब जानता  है।
आपका नाम, पता और आपको भी
आपके अस्तित्व को भी।

बेहतर होगा अगर आप मुझे जान लें ,
क्योंकि मैं ही तो हूँ अर्थ दाता आपके जीवन का।
मेरे बिन आपकी मेहनत, मेहनत नहीं,
आपका पसीना पसीना नहीं।
मैं ही तो तय करता हूँ की आप हैं,
है आपका भी कोई “आधार”  इस मुल्क में।
आप नागरिक हैं , पुरुष हैं, या महिला
इंसान भी हैं की नहीं , या कोई होने वाले अपराधी !
तय करता हूँ मैं ही, की आपकी उंगलिया आपकी ही तो हैं,
ये आँखों की पुतलियां आपकी ही आँखों में चमकती हैं.
इनमें मुहब्बत , इरादे या सपने नहीं
अब आपका आधार या वजूद छुपा है इनमें –
उस मशीन से होता हुआ.
आपका शरीर अब आपका नहीं,
और तो और आपकी आत्मा भी अब मेरी ही है।
ख़बरदार मेरे खिलाफ बोले तो
क्योंकि मैं ही हूँ नयी सदी का बाबा, मुल्ला या पादरी
स्वयं को पूर्ण समर्पित करो और
सिख लो मेरे लिए कहना
ओह तू परमात्मा  (O T P ).

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