मानसी अभी भी विचारों की उधेड़बुन में थी। आख़िर इस खुबसूरत जंजाल से वो बाहर निकले भी तो कैसे? खुबसूरत, क्योंकि शायद किसी का साथ, किसी का एहसास तथा आपको ये आभास की शायद कोई आपके लिए है, अपने आप में एक बेहद रोमांचक, गुदगुदा और अलग सा भावनात्मक आवेग है। और जंजाल, क्योंकि इस एहसास के साथ जुड़े हैं किसी और के भी एहसास, किसी एक और अपने की यादें और रिश्ते । ये अपनापन भी अजीब चीज़ है ना, कभी आपको किसी मज़बूती की दिलाता है दूसरे ही पल किसी कमज़ोरी का। अब मैं निकल कर किस तरफ जाऊं? उसे लग रहा था रहा था की इतनी बेचैनी तो शायद उसे तब भी नहीं थी जब उसे अनुज ने छोड़ने का फ़ैसला कर लिया था।
हालाँकि शायद दर्दों की कोई तुलना नहीं होती। हर दर्द अपने आप में एक ख़ास दर्द होता है। जब वो होता है तो लगता है शायद इससे बड़ा दर्द न पहले कभी था और न ही आगे कभी होगा। हर समय का दर्द एक अलग ही तरह की कसक के लिए होता है। अनुज के जाने के बाद लगता था की इस दर्द के सामने दुनिया का हर दर्द कम ही होगा। हर दर्द से लड़ सकती हूँ मैं- मानसी अपने आप को यही बताया करती थी। जब समीर मेरे जीवन में आया तो लगा की शायद जीवन में फिर वो रंग भर जाएँ जो पहले थे। पर अगले ही पल दिल और दिमाग को जैसे बिजली का करंट मार गया था। Continue reading