मेरी नन्ही परी

एक नन्ही परी है वो
खुशियों की पोटली सी

उसकी आँखें हो जैसे
एक नयी दुनिया सी

उसकी खिलखिलाहट
फूलों का खिलना है

उसकी किलकारी
बारिश का गिरना है

उसका रोना जैसे
हो एक पुकार सी

उसका आना हो एक नए
कोंपल का आगाज़ जैसे

एक नन्ही परी है वो
खुशियों की पोटली सी

एक कविता

कहीं पर अटकी सी एक कविता
कहीं पर लटकी सी एक कविता

विचार हैं ढेर सारे पर आते नहीं ,
धुनें है पर बजती नहीं
शाम है , सुबह है ,धुप भी है , छाँव भी ,
खुशियां हैं पर खिलती नहीं.
मगर फिर भी है ,
कुछ कहने के इंतज़ार में
रुकी रुकी सी एक कविता।