ये शब्द एक जाल हैं,
जो उलझाये रखते हैं
इंसानी जज्बातों को.
हर भावना के लिए,
बना हुआ है एक शब्द.
हमारी सोच भी
तकती रहती है
इन शब्दों की और.
रिश्तों को मापने का पैमाना
बन जाते हैं ये शब्द.
कहते हैं शब्द माध्यम हैं
प्यार के इज़हार का.
पर प्यार तो अहसास है
अहसास नहीं मांगता शब्द
अहसास तो चाहता है
सिर्फ अहसास ही, शब्द नहीं.
शब्द तो भाषा है नफरत की,
शिकायतों की, नाराजगियों की
दूरियों की, रिश्तों को बाँटने की,
मुहब्बत इनसे बाहर निकलना है
एहसास को पहचानना है.