बेचैन करती है उसकी ये उदासी
कारण अकारण
लगता है जैसे सब कुछ थमा हो
ये न थमने वाला वक़्त भी.
ऐसा लगता है जैसे मौसम ने बदलना
कर दिया हो बंद,
उसका न बोलना कोयल का थम
जाना हो जैसे.
उलझ जाता हूँ मैं उसकी उदासी
ओर अपने सवालों में
क्यों, कैसे और न जाने क्या क्या.
ये मेरे अपने ही सवाल है
पर उसकी उदासी में
मेरे ही हैं जवाब भी.
क्योंकि कोई बात करने वाला नहीं
कोई सुनने वाला भी नहीं
और न ही कहने वाला भी
बस सब कुछ रुका रुका
थमा थमा सा है